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Amritsar : Interfaith Conference
Dr. BK Binny participated in the Interfaith World Peace Conference organized at the Amritsar Golden Temple for the 550th Birth Anniversary of Shri Guru Nanak Dev in historic Diwan Hall.
Dr. BK Binny addressed the conference and was also honored by the President of the Shiromani Gurudwara Committee at the Interfaith World Peace Conference.
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Inauguration of Dadi Chandramani Global Peace Auditorium
पंजाब जोन प्रभारी राजयोगिनी उत्तरा दीदी ने भी अपनी शुभकामनाये देते हुए कहा कि आज बहुत ही ख़ुशी हो रही है दादी चंद्रमणी जी से हमने बहुत पलना ली उस दादी की यादगार में इस भव्य हॉल का उद्धघाटन हो रहा है।निश्चय ही यह हॉल आगे चलकर बहुत सेवाएं करेगा यह सोचकर मेरा मन गद गद हो रहा है।
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Amrtisar-Guru Nanak Dev anniversary
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अमृतसर : श्रीमद्भागवत गीतासार -मनुष्य जीवनका आधार
“गीता माता है जिस ने हर धर्म रूपी बच्चे को अमृत पिलाया है।कर्म में करुणाभाव को लाना,श्रेष्ठ कर्म करना यही गीता
ज्ञान का सार है” उपरोक्त महा वाक्य आदरणीय राजयोगिनी ब्रह्मा कुमारी उषा बहन जी ने जो कि प्रजापिता
ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मुख्यालय माउंट आबू राजस्थान में वरिष्ठ राजयोग प्रवक्ता हैं जी ने फ़ोर एस.
मार्डन हाई स्कूल के आर्डीटोरियम में विशाल जन समूह को संबोधित करते हुऐ कहे प्रजापिता ब्रह्माकुमारीस ईश्वरीय
विश्व विद्यालय अमृतसर की ओर से किये जा रहे “गीता सार- जीवन का आधार' नामक संगोष्ठी “ में कहे।ब्रह्मा कुमारी
उषा बहन जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता मनुष्य मात्र की माँ है। जैसे माँ आपने हर बच्चे की रक्षा करती इसी प्रकार
श्रीमद्भागवत गीता का ज्ञान मनुष्य मात्र को संसाारिक परिस्थितियों से,अपने संस्कारों, अपनी पुरानी आदतों पर कैस
विजय प्राप्त करनी है सिखाता है।हर धर्म के शास्त्र का किसी न किसी रूप से गीता का जुड़ाव है।उन्होंने बताया कि
भागवद् गीता में 6 चैपटर ज्ञान योग,6 चैपटर कर्म योग तथा 6 चैपटर भक्ति योग के है। हर धर्म पिता ने इन्हीं किसी एक
चैपटर से आपने अनुसार मानव कल्याण के लिए उठा लिया है मनुष्य की आज संसार में महाभारत जैसी स्थिति हर
मानव की हो गयी है इसलिए भगवान ने केवल एक अर्जुन को ही गीता ज्ञान नहीं सुनाया परन्तु ईश्वर ने दुनियाँ में हर
अर्जुन अर्थात् हर मनुष्य मात्र को, जिस की भगवान से प्रीत है उसको इस दुनियाँ में कैसे चलना है, अपने संस्कारों, अपनी
पुरानी आदतों पर कैसे विजय प्राप्त करनी है सिखाता है ।दुर्योधन को अर्थात् जो अंहकारी व्यक्ति हैं उसको भगवान नहीं
सिखाता है।लेकिन भगवान की जिस से प्रीत बुद्धि है उन को ही ईश्वर पिता सिखाता हैअर्थात् इस कर्म क्षेत्र रूपी युद्ध में
विजय कैसे प्राप्त करें । इस लिए आज के युग में श्रीमद्भागवत गीता का महत्व बहुत बढ़ गया है। परन्तु उस श्रीमद्भागवत
गीता को हम समझने की आवश्यकता है ।उषा वहन ने बताया कि कर्म में श्रेष्ठ भाव को लाना यही गीता का सार
है।सम्मेलन शुरू होने से पहले मेयर करमजीत सिंह रिटू, डा० जसजीत शाशी,ओरी हास्पीटल से डा० रीणा ओरी, डा०
ओंकार सिंह, किरण जेतली,डा० शारदा अदलखा, राजेन्द्र मोहन सिंह शीना, पूर्व मेयर बख्शी राम आरोडा आदि विशेष
महानुभावों ने दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का बिधिवत शुभारम्भ किया तथा वी. के.उषा बहन जी का गुलदस्तों से
सम्मानित किया।
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